Recognize Power of Subconscious Mind
1.अवचेतन मन की शक्ति को पहचानें (Recognize Power of Subconscious Mind),अवचेतन मन की शक्ति को कैसे पहचानें? (How to Recognize Power of Subconscious Mind?):
- अवचेतन मन की शक्ति को पहचानें (Recognize Power of Subconscious Mind) क्योंकि हम अधिकतर कार्य अवचेतन मन के निर्देश के अनुसार करते रहते हैं।चेतन मन या मन के बारे में तो कई लेख इस वेबसाइट पर पोस्ट किए हुए हैं परंतु अवचेतन मन के बारे में यह पहला लेख है।
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2.चेतन और अवचेतन मन का संबंध (The Relationship Between the Conscious and the Subconscious Mind):
- संसार में दो तरह के लोग होते हैं।एक वो,जो आत्मविश्वास से भरे होते हैं।वे जानते हैं कि वे सफल होने तथा जीतने के लिए ही पैदा हुए हैं।दूसरे वे,जो डर और शंकाओं से भरे होते हैं।उनका डर उन्हें उसी जगह पर रोके रखता है,जहां वे हैं।ऐसे लोगों की संख्या भी अधिक होती है।सच्चाई यह भी है कि दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति सफल व सुखी होना चाहता है और इसके लिए सभी अपने स्तर से प्रयास भी करते हैं,किंतु उनमें से कुछ ही अपने जीवन को सफल बना पाते हैं।हमारे जीवन में असफलताओं के कई कारण हैं,उनमें से एक मुख्य कारण मन एवं उसकी गुप्त शक्तियों का सही उपयोग न कर पाना है।दुनिया में इतनी अव्यवस्था और दुःख इसीलिए हैं,क्योंकि अधिकांश लोग अपने चेतन और अवचेतन मन के आपसी संबंध को नहीं समझते हैं।
- मन का नियम विश्वास का नियम है।अपने मन की कार्यविधि में विश्वास करना,स्वयं पर विश्वास करना है।मन का विश्वास और कुछ नहीं,मस्तिष्क का विचार है।सफलता तो मन के विश्वास के कारण मिलती है।क्रिया और प्रतिक्रिया का नियम शाश्वत है।हमारा विचार क्रिया है और उस विचार पर हमारा अवचेतन मन स्वतः प्रतिक्रिया करता है।इसलिए हमें अपने विचारों पर नजर रखना आवश्यक है।हमारा विश्वास जैसा होगा,उसी के अनुरूप हमें सफलता मिलेगी।यदि हम बाहरी स्थितियों को बदलना चाहते हैं,तो हमें उनके कारणों को बदलना होगा।कारण को बदल देंगे तो परिणाम अपने आप बदल जाएगा।हर विचार एक कारण है और हर परिस्थिति परिणाम है।अपने विचारों को बदल लेने से,हमारी तकदीर खुद-ब-खुद बदल जाएगी।अपने जीवन को बदलने के लिए हमें अपने चिंतन में एक नया प्रमुख आधार-वाक्य स्थापित करना होगा।सच तो यही है कि अच्छा सोचेंगे,तो अच्छा होगा।बुरा सोचेंगे,तो बुरा होगा।हम वही बनेंगे,जो हम दिनभर सोचते हैं।
- मन के दो स्तर हैं-चेतन मन (तार्किक स्तर) और अवचेतन मन (अतार्किक स्तर)।चेतन मन को यथार्थवादी मन कहा जाता है,क्योंकि इसका संबंध बाहरी वस्तुओं से होता है।इसके अवलोकन के साधन पाँच इंद्रियां हैं।यह अवलोकन,अनुभव और शिक्षा से सीखता है;जबकि अवचेतन मन कल्पनावादी मन कहा जाता है।अवचेतन मन चेतन मन की तरह तर्क नहीं कर सकता,तुलना या विरोध नहीं कर सकता और न ही खुद कुछ सोच सकता है।ये सभी काम चेतन मन के हैं।अवचेतन मन तो बस,चेतन मन द्वारा इस पर छोड़ी गई छापों पर प्रतिक्रिया करता है।इसे जो दिया जाता है,उसे ले लेता है।हमारा चेतन मन (तार्किक स्तर) जिस बात पर यकीन करता है,अचेतन मन उसे स्वीकार कर लेता है और उसके अनुरूप कार्य करता है।हम चेतन मन से जो विचार करते हैं,उनमें से आदतन विचार अवचेतन मन में उतर आते हैं,जहां अवचेतन मन विचारों की प्रकृति के अनुरूप परिस्थितियाँ बनाता है।इसलिए नकारात्मक वाक्यों का प्रयोग कभी ना करें,जैसे-मैं यह काम नहीं कर सकता।अवचेतन मन उसी बात को सच मान लेता है और उसे क्रियान्वित करने लगता है।
3.अवचेतन मन की शक्ति (Power of the subconscious mind):
- अवचेतन मन में अद्भुत व चमत्कारी शक्तियां हैं।यदि हम खुले दिमाग के और ग्रहणशील हैं,तो अवचेतन मन में मौजूद असीमित ज्ञान हमें वह हर चीज बता सकता है,जिसकी हमें जरूरत है।सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जब अवचेतन मन किसी विचार को स्वीकार कर लेता है,तो वह इस पर काम करने लगता है।अब चेतन मन का नियम अच्छे तथा बुरे,दोनों तरह के विचारों पर समान रूप से कार्य करता है।यदि इस नियम का नकारात्मक प्रयोग किया जाए,तो यह असफलता,कुण्ठा और दुःख उत्पन्न करता है।दूसरी तरफ इसके सकारात्मक प्रयोग से सफलता व समृद्धि मिलती है।
- केवल चेतन मन के पास चुनने की शक्ति है।हमारा चेतन मन द्वारपाल है।इसका प्रमुख काम झूठी छापों से हमारे अवचेतन मन की रक्षा करना है।चुनाव करने की क्षमता चेतन मन की सबसे महत्त्वपूर्ण शक्ति है,इसलिए हमें अपने प्रत्येक विचार का हिसाब देना होगा।कभी मजाक में भी यह ना कहें:’मैं असफल हो जाऊंगा’ या ‘मैं यह नहीं कर सकता’;क्योंकि हमारा अवचेतन मन कोई मजाक नहीं समझ सकता,यह इन चीजों को हकीकत में बदल देगा।हमारा चेतन मन जिसे भी सच मानता है,अवचेतन मन उसे स्वीकार कर लेगा और उसे हकीकत बना देगा।
- आत्मसुझाव (auto suggestion) का मतलब है खुद को किसी निश्चित विशिष्ट बात का सुझाव देना।हर साधन की तरह इसके भी गलत प्रयोग से नुकसान हो सकता है,लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह बहुत उपयोगी बन सकता है।हमारे साथ जो भी हुआ है,इसलिए हुआ है; क्योंकि हमारे विश्वास के माध्यम से हमने अपने अवचेतन मन पर उसकी छाप छोड़ी।यदि हमने गलत संप्रेषण किया है या अपने अवचेतन मन तक विकृत अवधारणाएं पहुंचाई हैं,तो उन्हें जल्द से जल्द सुधारना सबसे महत्त्वपूर्ण है।बार-बार दोहराने पर हमारा अवचेतन मन इन्हें स्वीकार कर लेता है।नकारात्मक आत्मसुझाव को दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि सकारात्मक आत्मसुझाव का प्रयोग करें।
- बाहरी सुझाव (hetero-suggestion) का मतलब है किसी दूसरे व्यक्ति के सुझाव।सुझाव का प्रयोग स्वयं को अनुशासित और नियंत्रित करने के साधन के रूप में किया जा सकता है।इसका उपयोग दूसरों पर नियंत्रण करने के लिए भी किया जा सकता है।इस तरह के बाहरी सुझावों को स्वीकार करके हम उन्हें साकार करने में सहयोग देते हैं।इससे बचने के लिए हमारा पहला कदम उन बाहरी सुझावों के प्रति जागरूक बनना है,जो हम पर काम कर रहे हैं।इसके लिए नियमित रूप से दूसरों के थोपे गए नकारात्मक सुझावों की जांच करते रहना आवश्यक है।
- सच तो यह है कि दूसरों के सुझावों और बातों में हमें चोट पहुंचाने की थोड़ी भी शक्ति नहीं है।एकमात्र शक्ति हमारे अपने विचारों में है।हम अपने विचारों द्वारा उन्हें शक्ति देते हैं।हमें अपनी मानसिक सहमति देनी होती है और उन विचारों को स्वीकार करना होता है।तब वह विचार हमारा बन जाता है और तब हमारा अवचेतन उसे साकार करने के लिए काम करता है।हम दूसरों के नकारात्मक विचारों या सुझावों को अस्वीकृत कर सकते हैं और अच्छे विचारों को दृढ़ता से कह सकते हैं।हमारे चेतन मन के पास यह चुनाव करने की शक्ति है कि हम कैसी प्रतिक्रिया करेंगे।कोई भी सुझाव चेतन की इच्छा के बिना अवचेतन मन पर छाप नहीं छोड़ सकता।केवल चेतन मन में ही किसी सुझाव को अस्वीकार करने की शक्ति होती है।वास्तव में सुझाव में स्वयं की कोई शक्ति नहीं होती है।इसकी शक्ति तो इस बात से उत्पन्न होती है कि हम इसे मानसिक रूप से स्वीकार कर लेते हैं।सिर्फ तभी अवचेतन शक्तियां सुझाव की प्रकृति के अनुरूप काम करती हैं।आत्मसुझाव व बाहरी सुझाव का अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।प्रकृति की कोई भी शक्ति बुरी नहीं होती है।यह इस बात पर निर्भर करता है कि शक्तियों का कैसे प्रयोग करते हैं।
4.अवचेतन मन सतत क्रियाशील रहता है (The subconscious mind is constantly active):
- हम मानसिक रूप से जिसे भी सच मानेंगे और जिसका दावा करेंगे,हमारा अवचेतन मन उसे स्वीकार कर लेगा और उसे साकार कर देगा।अवचेतन मन कोई चयन या तुलना नहीं करता है,जो तार्किक प्रक्रिया के लिए जरूरी है।अवचेतन मन किसी भी सुझाव को स्वीकार कर लेगा,भले ही वह सरासर झूठा हो और सुझाव करने के बाद यह उसकी प्रकृति के अनुसार प्रतिक्रिया करेगा।उदाहरण के लिए यदि कोई सम्मोहन विशेषज्ञ किसी व्यक्ति को सुझाव देता है तो वह व्यक्ति पूरी सटीकता से उस भूमिका को निभाने लगेगा।वह व्यक्ति खुद को वही मान लेगा,जिसका सुझाव सम्मोहन विशेषज्ञ ने दिया है।ठीक यही काम हम प्रतिदिन अपने साथ करते हैं।बार-बार दोहराए जाने वाले नकारात्मक वाक्यों के प्रति हमारा अवचेतन मन सम्मोहित हो जाता है और उसी के अनुरूप अपनी प्रतिक्रिया करने लगता है।
- अवचेतन मन कभी नहीं सोता है और न ही कभी आराम करता है।यह हमेशा काम करता रहता है।चाहे हम जागे हों या सोए हों,हमारे अवचेतन मन की शक्ति हमारे शरीर के सभी महत्त्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करती है और सभी समस्याओं के उत्तर देती है।इसमें चेतन मन की किसी तरह की दखल की जरूरत नहीं होती है।जब हम सो जाते हैं,तब भी हमारा हृदय धड़कता रहता है।हमारे सीने और फेफड़ों की मांसपेशियाँ फेफड़ों में हवा भरती और निकालती रहती है।हमारा अवचेतन मन हमारी पाचन प्रक्रियाओं और ग्रंथियों के स्राव के अलावा हमारे शरीर के अन्य सभी अद्भुत जटिल कार्यों को नियंत्रित करता है।यह सब लगातार होता रहता है,चाहे हम जाग रहे हों या सोए हुए हों।
- हमारे अवचेतन मन की चमत्कारी शक्ति का पता चल सकता है,बशर्ते हम सोने से पहले इससे यह कह दें कि हम किसी विशिष्ट चीज को हासिल करना चाहते हैं।हमें यह जानकर आश्चर्य होगा कि इसके बाद हमारे भीतर ऐसी शक्तियां सक्रिय हो जाएंगी,जो हमें मनचाहे परिणाम की ओर ले जाएंगी।यह प्रायः हम सभी ने कभी न कभी अनुभव किया है कि जब हम कभी सुबह किसी निश्चित समय पर जागने का दृढ़ संकल्प करके सोते हैं तो ठीक उस समय हमारी आंख स्वतः खुल जाती है।अवचेतन मन वह गहरा कुआँ है,जिससे महान कलाकारों व वैज्ञानिकों ने आश्चर्यजनक शक्ति पाई।उन्हें अपनी अधिकतर जटिल समस्याओं का समाधान स्वप्न में मिला था।अवचेतन मन हमें समय और स्थान के बंधन से परे कर सकता है।यह हमारी सभी जटिल समस्याओं से मुक्त कर सकता है और हमारी सभी समस्याओं के जवाब दे सकता है,चाहे वे जो भी हों।हमारे भीतर ऐसी शक्ति और ज्ञान है,जो हमारी बुद्धि से परे है और हम सभी इसका लाभ ले सकते हैं।
5.चेतन मन का अवचेतन मन पर प्रभाव (Effects of the Conscious Mind on the Subconscious Mind):
- अवचेतन मन पर जो भी विचार,विश्वास या मत लिखते हैं,वे परिस्थितियों,स्थितियों और घटनाओं के रूप में प्रकट हो जाते हैं।इसलिए चेतन मन में मौजूद विचारों के बारे में सतर्क रहें,क्योंकि अवचेतन मन बहस नहीं कर सकता।यह तो सिर्फ उसी पर अमल करता है,जो आपने इस पर लिखा है।यह हमारे चेतन मन के निष्कर्षों या हमारे फैसले को अंतिम मान लेता है।हम हमेशा अपनी जीवनरूपी पुस्तक पर लिख रहे हैं,क्योंकि हमारे विचार ही अंततः हमारे अनुभव बन जाते हैं।किसी महापुरुष ने कहा है कि मनुष्य वही बन जाता है,जो वह दिनभर सोचता रहता है।’ सच तो यह है कि हमारा सामना हर बार अवचेतन मन के बजाय चेतन मन से होता है।इसलिए हमें हमेशा चेतन मन से सर्वश्रेष्ठ की आशा करते रहना चाहिए और यह पक्का करें कि हमारे आदतन विचार अच्छी,सुंदर व आदर्श चीजों पर केंद्रित हों।अपने चेतन मन का ध्यान रखें और दिल में जान लें कि हमारा अवचेतन मन हमारे ही आदतन विचारों के अनुरूप परिणाम दे रहा है,व्यक्त कर रहा है और परिस्थितियाँ बना रहा है। अवचेतन मन पर जो छाप पड़ती है,वह व्यक्त होती है।हम अपने अवचेतन मन पर जो भी छाप छोड़ते हैं,यह उसे साकार करने के लिए जमीन-आसमान एक कर देगा।इसलिए हमें इस पर सिर्फ सही व नकारात्मक विचारों की छाप ही छोड़नी चाहिए।
- हम अपने अवचेतन मन पर जो भी छाप छोड़ेंगे,वह बाहर व्यक्त होगी।हम व्यक्तिगत रूप से जिसे सच मानते हैं,वह परिस्थितियों,अनुभवों और घटनाओं के रूप में व्यक्त होगी।यदि हम नकारात्मक,विनाशक और दुष्ट विचार रखते हैं,तो वे विचार विनाशक भाव पैदा करते हैं।ये भाव बाहर निकलने का कोई ना कोई रास्ता खोज लेंगे और किसी न किसी तरह व्यक्त होंगे।चूँकि इन भावों की प्रकृति नकारात्मक है,इसलिए ये प्रायः अल्सर,दिल का रोग,डर,तनाव और चिंता के रूप में व्यक्त होते हैं।अपने अवचेतन मन में सद्भाव,सेहत और शांति के विचार भरें।इससे आपके शरीर की समूची कार्यप्रणाली दोबारा सामान्य हो जाएगी।हमारी अपने बारे में अपनी जो सोच या भावना है,हमारे अस्तित्व का हर हिस्सा उसी सोच की अभिव्यक्ति है।हम अपने अवचेतन मन पर जो छाप छोड़ते हैं,वह हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों में बाहर व्यक्त होती है।इसलिए हमें स्वस्थ,सुंदर व आदर्श विचारों का चुनाव करना चाहिए,ताकि हम अपने एक अद्भुत व्यक्तित्व की रचना कर सकें।
- तो देखा आपने मन में कितनी चमत्कारिक शक्ति है।यह चमत्कार आपके साथ भी हो सकते हैं,जब आप अपने अवचेतन मन की चमत्कारिक शक्ति का उपयोग करने लगते हैं।अवचेतन मन का उपयोग बताता है कि किस प्रकार आप स्वाभाविक सोच और काल्पनिक अवधारणाओं को अनुकूल बनाकर अपने भाग्य का निर्माण कर सकते हैं,क्योंकि मनुष्य अपने अवचेतन मन में जो कुछ सोचता है,वैसा ही होता है।
- समस्या के अंदर ही इसका हल है।हर एक प्रश्न में जवाब निहित है।यदि आपके सामने कठिन परिस्थिति है और आप अपना रास्ता साफ तरीके से नहीं देख सकते तो सबसे सही तरीका होगा,इस बात को सोचना कि आपके अंदर के अवचेतन मस्तिष्क को सब पता है।यह सब कुछ देख सकता है,इसके पास जवाब है और इसे यह आपको दिखा रहा है।आपकी नई मानसिक प्रवृत्ति जो रचनात्मक बुद्धिमत्ता ला रही है,उसके पास खुशनुमा हल है और आप जवाब पाने में सफल होंगे।निश्चित रहें,क्योंकि मस्तिष्क की इस प्रकार की प्रवृत्ति एक अनुशासन,शांति और आपके सभी उपक्रमों का अर्थ बताएगी।
- जब कभी डर आपके मन का दरवाजा खटखटाए या जब चिंता,परेशानी और किसी प्रकार का शक आपके मन में आए,अपनी नजर स्थिर रखें,साथ ही अपना ध्येय भी।अपने अवचेतन मन के अंदर की अनंत शक्ति के बारे में सोचें,जो आपकी सोच और कल्पना शक्ति से पैदा हो सकती है और ऐसा करने से आपके अंदर आत्म-विश्वास,शांति और साहस बनेगा।इसे बनाए रखें,जब तक रोशनी न हो जाए और अंधेरे की परछाई गायब न हो जाए।
- उपर्युक्त आर्टिकल में अवचेतन मन की शक्ति को पहचानें (Recognize Power of Subconscious Mind),अवचेतन मन की शक्ति को कैसे पहचानें? (How to Recognize Power of Subconscious Mind?) के बारे में बताया गया है।
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6.छात्र द्वारा शर्त न लगाने का व्रत (हास्य-व्यंग्य) (Student’s Vow Not to Bet) (Humour-Satire):
- अरुण:आज से मैंने फैसला कर लिया कि अब शर्त लगाकर सवाल हल नहीं करूंगा।
- हर्षित:तुम यह सवाल किसी भी सूरत में हल नहीं कर सकते।
- अरुण:लगाओ शर्त,अभी हल कर देता हूं।
7.अवचेतन मन की शक्ति को पहचानें (Frequently Asked Questions Related to Recognize Power of Subconscious Mind),अवचेतन मन की शक्ति को कैसे पहचानें? (How to Recognize Power of Subconscious Mind?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.मनोवृत्ति का संचालन कौन करता है? (Who governs the attitude?):
उत्तर:मनोवृत्ति का संचालन हमारा अवचेतन मन (subconscious mind) करता है।मनोवृत्ति जितनी पुरानी होती है उतनी ही मजबूत होती जाती है।फिर उसे बदलना या उसके विपरीत काम करना बहुत कठिन हो जाता है।
प्रश्न:2.विवेक और अवचेतन मन के अधीन काम करने में क्या फर्क है? (What is the difference between acting under the wisdom and the subconscious mind?):
उत्तर:जो काम विवेक का उपयोग करते हुए किए जाते हैं वे युक्तियुक्त और सार्थक होते हैं तथा उनके ऊपर अवचेतन मन का ऐसा प्रभाव नहीं पड़ता है कि काम का ढंग बदल जाए या उद्देश्य बदल जाए लेकिन जो काम पूरी तरह अवचेतन मन के प्रभाव में आकर किए जाते हैं वे पुराने संस्कारों से और अवचेतन मन की प्रवृत्ति से ही प्रभावित होकर किए जाते हैं।
प्रश्न:3.मन का प्रभाव अवचेतन मन पर किस प्रकार पड़ता है? (How does the mind affect the subconscious mind?):
उत्तर:मन विचार करता रहता है इसलिए नए-नए विचार करता है और पुराने भूलता जाता है।इन्हें याद रखना अवचेतन मन का काम है और अवचेतन मन की क्षमता को स्मरण शक्ति कहते हैं।मन और अवचेतन के कार्य अलग-अलग होते है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा अवचेतन मन की शक्ति को पहचानें (Recognize Power of Subconscious Mind),अवचेतन मन की शक्ति को कैसे पहचानें? (How to Recognize Power of Subconscious Mind?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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