6 Unfailing Spells of Time Management
1.समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (6 Unfailing Spells of Time Management),सफलता के लिए समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (6 Infallible Mantras of Time Management):
- समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (6 Unfailing Spells of Time Management) के आधार पर विद्यार्थी जान सकेंगे कि यह विद्यार्थी काल कितना महत्त्वपूर्ण और उपयोगी सिद्ध हो सकता है।शर्त यही है कि समय प्रबंधन की कला आपको आनी चाहिए।समय-प्रबंधन के बारे में और भी लेख इस साइट पर मिल जाएंगे परंतु यह लेख उनसे हटकर लिखा गया है।
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2.समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता (Time and tide wait for no man):
- संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं,जिसकी प्राप्ति मनुष्य के लिए असंभव हो।प्रयत्न एवं पुरुषार्थ से सभी कुछ पाया जा सकता है,लेकिन एक ऐसी चीज है जिसे एक बार गँवाने के बाद कभी नहीं पाया जा सकता और वह है समय।एक बार हाथ से निकला हुआ समय फिर कभी नहीं मिलता।कहावत भी है-“बीता हुआ समय और कहे हुए शब्द कभी वापस नहीं बुलाये जा सकते।” साधना द्वारा परमात्मा का साक्षात्कार कई बार किया जा सकता है,लेकिन गुजरा हुआ समय पुनः नहीं मिलता।समय की मर्यादा में सभी बंधे हुए हैं और भगवान भी समय की मर्यादा का सम्मान करते हैं।इसे सृष्टि के संचालक को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है।
- समय ही जीवन की परिभाषा है;क्योंकि समय से ही जीवन बनता है।समय का दुरुपयोग करना जीवन को नष्ट करना है।समय किसी की भी प्रतीक्षा नहीं करता।वह प्रतिक्षण,मिनट,घंटे,दिन,महीने,वर्षों के रूप में निरंतर अज्ञात दिशा को जाकर विलीन होता रहता है।समय की अजस्र धारा निरंतर प्रवाहित होती रहती है और फिर शून्य में ही विलीन हो जाती है।फ्रैंकलिन ने कहा है-“समय बर्बाद मत करो;क्योंकि समय से ही जीवन बना है।” निस्संदेह वक्त और सागर की लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करतीं।हमारा कर्त्तव्य है कि हम समय का पूरा-पूरा सदुपयोग करें।
- शेक्सपियर ने कहा है-“मैंने समय को नष्ट किया है,अब समय मुझे नष्ट कर रहा है।” सचमुच जो व्यक्ति अपना तनिक सा भी समय व्यर्थ नष्ट करते हैं उन्हें समय अनेकों सफलताओं से वंचित कर देता है।संसार में जितने भी महापुरुष हुए हैं,उनकी महानता का एक ही आधार स्तंभ है कि उन्होंने अपने समय का पूरा-पूरा उपयोग किया,एक क्षण भी व्यर्थ नहीं जाने दिया।जिस समय लोग मनोरंजन में मशगूल रहते हैं,व्यर्थ आलस्य-प्रमाद में पड़े रहते हैं,उस समय महान व्यक्ति महत्त्वपूर्ण कार्यों का सृजन करते रहते हैं।ऐसा एक भी महापुरुष नहीं,जिसने अपने समय को व्यर्थ नष्ट किया हो और वह महान बन गया हो।समय बहुत बड़ा धन है,भौतिक धन से भी अधिक मूल्यवान।जो इसे भली प्रकार उपयोग में लाता है,वह सभी तरह के लाभ प्राप्त कर लेता है।छोटे-से जीवन में भी बहुत बड़ी सफलताएँ प्राप्त कर लेता है।वह छोटी-सी उम्र में ही दूसरों से बहुत आगे बढ़ जाता है।
- समय सतत अजस्र अनुदानों से भरा-पूरा रहता है।होश में जीने वाले सचेत व्यक्ति उसका सदुपयोग कर लेते हैं,इसलिए उन्हें बुद्धिमान कहा जाता है,परंतु सामान्यतः हम बेहोश रहते हैं और सब कुछ गँवाते रहते हैं।कुछ भी हाथ नहीं लगता,बल्कि जो कुछ रहता है वह भी बिखर जाता है।इसके कारण में जाने पर,उसके रहस्य को खोजने पर पता चलता है कि अचेतनाजनित आलस्य ही इसका मुख्य जिम्मेदार है।आलस्य और वह भी बेहोशी भरा समय को फुलझड़ी के समान जलाता रहता है।बेहोश मानसिकता हमें किसी भी चीज का मूल्य आँकने-परखने नहीं देती है और यदि प्रयासपूर्वक कुछ ख्याल आता भी है तो कोई लाभ नहीं होता,क्योंकि उस पल तक अवसर हाथ से फिसल गया होता है।
3.नष्ट किया समय पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता (Lost time cannot be recovered):
- अस्त-व्यस्त जीवन शैली और नकारात्मक आदतें भी बहुमूल्य अवसरों को होली के समान जलाती रहती हैं।ये साधनों को,जिनके द्वारा सफलता पाई जा सकती है,उन्हें या तो नष्ट कर देती हैं या उन्हें अत्यंत जटिल बना देती हैं।फलतः जो काम आसानी और सरलता से हो जाता,वही उलझकर रह जाता है और अंत में सब कुछ समाप्त हो जाता है।आज की व्यस्ततम और आधुनिक जीवनशैली की गहराई में झाँकें तो यही तथ्य नजर आता है।इस संदर्भ में विख्यात समय प्रबंधनकर्त्ता रॉबर्ट रोसेक का कहना है कि समय अपनी गति के अनुरूप चल रहा है।इसकी गति न तो अधिक है न कम।24 घंटे की इसकी अवधि भी निश्चित है।सभी के लिए यही समय है और इसी समय को साधन के रूप में प्रयुक्त करना होता है।रॉबर्ट के अनुसार-“आधुनिक तकनीकी को समयानुकूल,सहज-सरल बनाने की आवश्यकता है।इसके साथ ही अपनी अस्त-व्यस्त जीवनशैली को सुव्यवस्थित तथा सोच को कार्य के अनुरूप ढालना चाहिए तभी समय का सार्थक सदुपयोग हो सकता है।”
- समय का परिस्थिति के अनुरूप उचित एवं सार्थक ढंग से उपयोग समय-प्रबंधन कहलाता है।किसी भी कार्य में सफलता का अमोघ मंत्र हैःकार्यों की पूर्व योजना बनाने की आदत।इससे कार्यकुशलता के साथ-साथ ठीक समय पर कार्य को निबटाने की दक्षता आती है।एक साथ कई चीजों को याद रखने या करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और सब कुछ बहुत आसान हो जाता है।यदि आसान न भी होता हो तो आसान लगे लगता है।सामान्य तौर पर कार्य करते समय अनेक कार्य मस्तिष्क में घूमने लगते हैं,इन सभी में ऐसे कार्य का चुनाव करना चाहिए,जिसकी आवश्यकता सर्वोपरि हो।प्राथमिकता उसी कार्य को देनी चाहिए,जो हमारे वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग हो,इस प्रकार कार्यों का वरीयता क्रम तय करना चाहिए।
- तत्पश्चात समय सारणी बनानी चाहिए कि इस कार्य को कितने समय में और कब तक पूरा करना है।हम प्रोडक्टिव ओवर्स यानी मुख्य कार्यकाल की समय-सारणी भी बना सकते हैं।समय सारणी के मुख्य घटक हैं:(1.)प्रातः उठने का समय (2.)दैनन्दिन क्रियाकलापों का समय (3.)स्कूल-कॉलेज या कार्यालय जाने का समय (4.)बीच का अंतराल (5.)कार्यालय आदि के बाद का समय (6.)घरेलू सदस्यों का समय (7.)मनोरंजन काल (8.)शयन काल
- समय सारणी बनाने के पश्चात अपनी पूरी जिम्मेदारी समझकर कार्य का शुभारंभ करना चाहिए।इस प्रकार चरणबद्ध ढंग से नियत समय में किया गया कार्य अवश्य सफल होता है।आधुनिक भाषा में इसे ही समय प्रबंधन कहा जाता है।समय-प्रबंधन में कतिपय तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए- (1.)एक समय में सदा एक ही काम करो।(2.)आवश्यक कार्यों को तुरंत कर डालो,उन्हें दूसरे समय के लिए टालकर न रखो।जो लोग कार्यों को टालते जाते हैं,उनके बहुत से कार्य सदा बिना किए ही पड़े रह जाते हैं और जिससे कभी-कभी बहुत नुकसान हो जाता है।(3.)जो काम स्वयं तुम्हारे करने का हो,उसे दूसरे पर कभी मत छोड़ो।(4.)बहुत अधिक शीघ्रता कार्य को नष्ट कर देती है,इसलिए कार्य को अत्यधिक शीघ्रतापूर्वक न करो और साथ ही आरामतलबी से भी न करो।(5.)समय की बचत के लिए तकनीकी वैज्ञानिक-संसाधन प्रयुक्त किए जाने चाहिए।(6.)किसी कार्य को आरम्भ करने के उपरांत उसे पूरा करके ही विश्राम लो।यदि इस दौरान शारीरिक या मानसिक थकान महसूस होती है,तो आवश्यकतानुसार विश्राम किया जा सकता है।
4.समय के सदुपयोग में ही सार्थकता (Meaningfulness in the proper use of time):
- काल का नियम ही है:अनवरत निरंतर बहना।इस सच्चाई को समझा जाए कि हम भी इस धारा में बह रहे हैं।अतः हम अपने समय-दिन,महीने,वर्षों का सदुपयोग करना सीख जाएँ।ऐसी कार्य-योजना बनाई जाए,जिसमें प्रत्येक वर्ष के साथ प्रत्येक दिन और हर पल के उद्देश्यपूर्ण उपयोग का सुअवसर हो।कोई भी पल एवं क्षण व्यर्थ न जाने पाए;क्योंकि जीवन का नन्हा क्षण भी बहुमूल्य एवं बेशकीमती होता है।ध्यान रहे,कार्य योजना एकांगी ना हो,बहुआयामी हो।इसमें हमारे चिंतन,चरित्र,व्यवहार से लेकर परिवार,समाज,कार्यालय सभी संपूर्ण रूप से समय के सामंजस्य के साथ प्रतिपादित-परिभाषित हों।
- समय के सदुपयोग में ही जीवन की सार्थकता सिद्ध हो सकती है।समय के महत्त्व को पहचान कर ही जीवन में आने वाले उचित अवसरों का सदुपयोग किया जा सकता है।इसके लिए हमें प्रत्येक पल,प्रत्येक दिन को संपूर्ण एवं समग्र रूप से जीना सीखना चाहिए।समय का सदुपयोग करके जीवन जीने की कला सीखी जा सकती है और एक परिष्कृत आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण किया जा सकता है।
5.विद्यार्थियों के लिए समय का महत्त्व (The Importance of Time for Students):
- टाइम-टेबल के अनुसार अध्ययन अर्थात् समय की पाबंदी,समय की बचत और प्रत्येक कार्य को व्यवस्थित ढंग से नियत समय पर ही करना।सुव्यवस्थित और नियमित जीवनशैली से विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में लाभ होता है।सबसे बड़ा लाभ तो यही होता है कि हम समय की कद्र करना सीख जाते हैं।हमारे इस जीवन की ही नहीं बल्कि संसार भर की सर्वाधिक मूल्यवान,इतनी मूल्यवान कि जिसका मूल्य दिया ही नहीं जा सके,ऐसी अमूल्य वस्तु यदि कोई है तो वह समय है।जो समय आपने गुजार दिया वह किसी भी मूल्य पर आप प्राप्त नहीं कर सकते।ऐसी मूल्य वस्तु को लोग व्यर्थ नष्ट करते रहते हैं,कोई फालतू गप्पे लड़ा रहा है,कोई ताश खेल रहा है,कोई सोशल प्लेटफॉर्म पर व्यस्त है,कोई वीडियो कॉलिंग कर रहा है,कोई घंटों फोन पर वाहियात बातें कर रहा है और भी कई शुगल हैं लोगों के।
- आप उनसे पूछें कि भई,क्या हो रहा है तो कहेंगे-कुछ नहीं,यूं ही टाइम पास (pass) कर रहे हैं।ऐसे बुद्धू यह नहीं सोच पाते कि हम भला टाइम को क्या पास करेंगे,उल्टे हम खुद ही पास हुए जा रहे हैं।इसलिए जो बिल्कुल ही पास हो जाते हैं उनके लिए अंग्रेजी में passed away कहा जाता है अर्थात् गुजर गए गोया चल बसे।सुबह होती है,शाम होती है,उम्र यूं ही तमाम होती है।इससे सिद्ध होता है कि समय हमारी उम्र का ही नाम है और हम जितना समय व्यर्थ गुजारते हैं उतना जीवन नष्ट कर देते हैं लेकिन हैरत की बात यह है कि इसका हमें जरा भी अफसोस नहीं होता।जेब से 10 का नोट गिर जाए तो हम दुःखी हो जाते हैं हालांकि हम उसे फिर से प्राप्त कर सकते हैं फिर भी ₹10 खोने का गमजा करते हैं पर 10 मिनट या 10 घंटे फालतू खो देने पर जरा भी अफसोस नहीं करते।करें भी कैसे,इस तरफ हमारा ध्यान हो,तभी तो करें।हम सोचते हैं कि ऐसी जल्दी भी क्या है इतना वक्त पड़ा है,लंबी उम्र पड़ी है पर हम जरा पूरी उम्र का हिसाब तो लगाकर देखें कि हमें काम करने के लिए समय कितना मिलता है।आप अभी बच्चे हैं तो पूरी उम्र का हिसाब ना लगाकर सिर्फ आपके विद्यार्थी जीवन के 25 वर्षों पर विचार करते हैं।
- जन्म से लेकर 5 वर्ष की आयु तक का समय तो आपकी अबोध अवस्था में निकल गया,बचे 20 वर्ष।यदि आप रोज रात औसतन 8 घंटे सोते हैं तो 20 वर्षों में लगभग 7 वर्ष तो सोकर ही गुजार देते हैं।इसके अतिरिक्त शौच स्नानादि नित्य कर्म करने,दोनों वक्त भोजन करने,स्कूल में जाने आने आदि कामों में औसतन चार घंटे और एक घंटा अन्य फुटकर कामों में यानी कुल मिलाकर 5 घंटे प्रतिदिन लगते हों तो 20 वर्ष में लगभग 4 वर्ष लगेंगे।गोया कुल 20 वर्ष में 11 वर्ष,यानी आधे से ज्यादा समय यूं ही गुजर जाएगा।इतना समय कम करने पर शेष 9 वर्ष आपके हाथ में बच जाते हैं।इस अवधि में आप खेलकूद,गप्पे लड़ाने,सिनेमा,टीवी देखकर,सोशल मीडिया,वीडियो कॉलिंग,इधर-उधर आने-जाने में कितना समय और गुजार देते हैं उसका हिसाब आप लगा लें और 9 वर्ष में से घटा लें,फिर इस मुद्दे पर गौर करें कि 25 वर्ष के विद्यार्थी जीवन में आपके पास कितना समय बचता है जिसमें आप अपने भावी जीवन को उन्नत,श्रेष्ठ,सुख-समृद्धिपूर्ण बनाने के लिए प्रयत्न कर सकेंगे।
6.विद्यार्थियों को सुझाव (Suggestions to students):
- जिस विद्या और ज्ञान का कोई और छोर नहीं है उसे प्राप्त करने के लिए आपको इस आयु में कितना समय चाहिए,कितना परिश्रम करना चाहिए इस पर विचार करें क्योंकि यह समय फिर जीवन में कभी दोबारा मिलने वाला नहीं है।समय तो गुजरने ही वाला है,घड़ियां टिकटिक करती रहेंगी समय रुकने वाला नहीं है,आप अपनी घड़ी बंद भी कर दें तो भी समय की रफ्तार बंद होने वाली नहीं है।सोचने वाली बात यह है कि गुजरते समय से आपने क्या लाभ उठाया,क्या सीखा,क्या पाया? या यूं ही गंवा दिया यानी कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे।
- जरा यह तो सोचिए की गुजरा हुआ यह समय,यह बेफिक्री और जिम्मेदारियां से रहित जीवन,जिसमें आपको न आटे दाल की फिक्र करनी पड़ती है और न नोन तेल लकड़ी की,सिर्फ पढ़ने लिखने और सीखने समझने तथा अपने भावी जीवन की मजबूत बुनियाद बनाने के सिवा और कुछ करने की कोई जरूरत आपको नहीं है,ऐसा जीवन क्या फिर आपको मिल सकेगा जबकि ये खेल तमाशे,सिनेमा,टीवी तो मिलते ही रहेंगे।ये कहां जाने वाले हैं? आप इस लायक बन जाएं कि जो चाहे सो प्राप्त कर सकें,इसकी कोशिश इस विद्यार्थी जीवन में ही की जा सकती है और यह कोशिश है अच्छा आहार-विहार करके स्वस्थ रहते हुए अपने जीवन को उन्नत,श्रेष्ठ,अपना आचरण और व्यक्तित्व श्रेष्ठ बनाना और सब सुख-सुविधाओं की चाह छोड़कर मन वचन कर्म से अच्छी विद्या प्राप्त करना।बस,इसका ही नाम विद्यार्थी जीवन है।
- विद्यार्थी का अर्थ होता है विद्या की इच्छा रखने वाला यानी विद्या का अर्थी,विद्यार्थी होता है।अतः आपकी सिर्फ एक ही इच्छा होनी चाहिए विद्या प्राप्त करना,एक ही लक्ष्य होना चाहिए विद्या प्राप्त करना और एक ही धुन होना चाहिए विद्या प्राप्त करना।यह संकल्प,यह प्रतिज्ञा और यह मकसद आपके इस जीवन की बुनियाद होना चाहिए।यदि इस कसौटी पर आप खरे साबित नहीं होते तो विद्यार्थी की जो परिभाषा ऊपर बताई गई है वह आप पर लागू नहीं हो सकेगी।आप फिर इस मायने में विद्यार्थी नहीं माने जाएंगे बल्कि आपने केवल विद्यार्थी का वेश और चोला पहन रखा है अर्थात् वास्तव में आप अपनी कब्र खोदने का कार्य कर रहे हैं।अब आप सोच लीजिए कि कौनसे अर्थ वाले विद्यार्थी बनना चाहते हैं।
- समय के किसी क्षण का पता नहीं होता कि कौनसा क्षण हमारे भाग्योदय का हो सकता है अतः आपको हरक्षण सतर्क,जागरूक और सावधान होकर उसका उपयोग करना चाहिए ताकि आप अवसर को तत्काल लपक लें।थोड़ी-सी भी गफलत से अवसर हाथ से निकल सकता है।आपको ज्ञात है कि कठिन परिश्रम से सफलता प्राप्त की जा सकती है,परंतु कठिन परिश्रम भी समय पर नहीं किया जाए तो वह व्यर्थ ही है इसलिए जिस समय जो कार्य करना है उस समय वही कार्य करें,नियत समय पर कार्य करने की आदत डालें।परीक्षा से पूर्व परीक्षा की तैयारी जरूरी होती है।परीक्षा के बाद कठिन परिश्रम करने का कोई औचित्य नहीं है।अतः समय सारणी के अनुसार नियत समय का सदुपयोग करें।अक्सर सत्रारम्भ से कुछ विद्यार्थी अध्ययन को टालते रहते हैं और फिर अध्ययन का बोझ (कार्यभार) बढ़ जाता है और विद्यार्थी तनावग्रस्त हो जाते हैं क्योंकि अध्ययन कार्य इकट्ठा हो जाने पर उसको निपटाना मुश्किल हो जाता है।नियत समय पर अध्ययन कार्य करने के साथ-साथ नियमितता भी होनी चाहिए।एक दिन 10 घंटे पढ़ लिया,दूसरे दिन एक घंटा पढ़ लिया,तीसरे दिन कुछ नहीं पढ़ना इस प्रकार की कार्यशैली हमें सफलता से दूर कर देती है।अतः अपने समय के एक-एक क्षण का उपयोग करने की कुशलता हासिल करें आपके लिए यही सबसे बड़ी साधना है।
- उपर्युक्त आर्टिकल में समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (6 Unfailing Spells of Time Management),सफलता के लिए समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (6 Infallible Mantras of Time Management) के बारे में बताया गया है।
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7.समय का उपयोग (हास्य-व्यंग्य) (Use of Time) (Humour-Satire):
- माँ:तान्या,बेटा इन पुस्तकों को इधर-उधर और ऊपर-नीचे क्यों रख रहे हो? मैं बहुत देर से ऐसा करते हुए देख रही हूं।
- तान्या:मां,आपने ही तो कहा था कि समय के एक-एक क्षण का उपयोग करना चाहिए,इसलिए मैं अपने समय का उपयोग कर रहा हूं।समय को नष्ट नहीं कर रहा हूं।
- मां:बेटे,लक्ष्यहीन कार्य करना भी समय नष्ट करना ही होता है।सही लक्ष्य के लिए समय का उपयोग करना समय नष्ट करना नहीं होता।
8.समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (Frequently Asked Questions Related to 6 Unfailing Spells of Time Management),सफलता के लिए समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (6 Infallible Mantras of Time Management) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.विद्यार्थी का पूरा जीवन अच्छा बीताने का क्या तरीका है? (What is the best way for a student to have a good life?):
उत्तर:अपने हर दिन की शुरुआत जागृत और सतर्क होकर करें तो अपनी आंखों से दिन का जन्म होना भी देख सकते हैं साथ ही जिस दिन को जिस ढंग से शुरू करना चाहे वैसे ही कर सकते हैं ताकि पूरा दिन ही अच्छा बीते।प्रत्येक दिन अच्छा बीते तो इसका मतलब होगा कि पूरा जीवन अच्छा ही बीतेगा।
प्रश्न:2.सोने और जागने का क्या नियम है? (What are the rules for sleeping and waking up?):
उत्तर:पहले पहर में सब जागते हैं,दूसरे पहर में भोगी (ऐयाश) जागते हैं,तीसरे पहर में चोर जागते हैं और चौथे पहर में जोगी जागते हैं।चौथे पहर में सूर्योदय से पहले के समय को ब्रह्ममुहूर्त कहा गया है।विद्यार्थी भी कर्मयोगी होता है अतः उसे रात के चौथे पहर में जागृत होना चाहिए।
प्रश्न:3.सुबह जल्दी कैसे उठें? (How do you get up early in the morning?):
उत्तर:सुबह जल्दी उठने का मन को सजेशन देकर रात को सोएं अथवा सुबह 4:00 बजे का अलार्म लगाकर रात को 10:00 बजे सो जाएं।आंख खुलते ही या अलार्म की आवाज से फौरन उठ जाएं ताकि नींद की खुमारी और आलस्य के प्रभाव से फिर से न सो जाएं।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (6 Unfailing Spells of Time Management),सफलता के लिए समय प्रबन्धन के 6 अमोघ मन्त्र (6 Infallible Mantras of Time Management) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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